एक कंजूस और लालची किसान

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बहुत पहले एक किसान हुआ करता था। वह बहुत ज्यादा कंजूस और लोभी था। उसके व्यवहार से सम्बन्धित रिश्तेदार और नजदीकी लोग परेशान थे। कुछ व्यपारी ने उससे सौदेबाजी करने की भी कोशिश की थी, लेकिन वे सभी विफल हो गए और सभी ने इसे ज्यादा नकारात्मक माना। यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि उसने कभी भी उधार दिया या नहीं। (Small story in hindi, Best story in Hindi, best story in hindi, Very short story in hindi)

इस प्रकार वह कई वर्षों तक बचत करते-करते वह लोभी किसान लगभग अमीर बन गया। हालांकि, उसने जीवन में ना तो बेहतर खाना खाया और ना ही किसी को खिलाया साथ ही साथ तमाम उम्र रद्दी कपड़े पहने रखा। उसके पास किसी को सहायता या दान स्वरूप देने के लिए एक रूपया भी नहीं था। लेकिन जिस बात से वह बहुत दुखी था , वह था ‘उसके पड़ोसी किसान की समृद्धि’। यह पड़ोसी उससे सभी मामलों में समृद्ध था, हालांकि वह अपने पड़ोसी के उलट उदार था।

उदार किसान (जिसका नाम चार्ल्स था) की ज़मीन पर एक बौना या पहाड़ी व्यक्ति रहता था। उस बौने व्यक्ति ने लालची किसान से सौदेबाज़ी के लिए एक दांव चला। वह लालची किसान के घर गया और जल्दबाजी में उससे पूछा कि क्या वह हलवा बनाने के लिए उसे आधे पत्थर के बराबर आटा दे सकता है ? यह कहते हुए कि अगर वह उसे पहाड़ी पर ले जाने के लिए एक थैला उधार देगा, तो उसे साफ और अच्छी स्थिति में लौटा दिया जाएगा।  किसान ने आधी आंख से देखा कि यह उसके पड़ोसी की जमीन पर रह रहा बौना है और जैसा कि उसने हमेशा से सोच रखा था कि अच्छे लोगों के पक्षधर होने की वजः से उदार किसान की ऐसी किस्मत है, यह सोच कर उसने छोटे से आदमी के साथ पूरी शिष्टता के साथ व्यवहार करने का संकल्प लिया। 

उसने पत्नी से कहा, ‘ यह समय आधे पत्थर के बराबर आटा बचाने का नहीं है, जब हम एक ही झटके में अपनी किस्मत बना सकते हैं। मैंने अपने दादा जी और एक आदमी द्वारा उधार देने के बारे में सुना है, जो कि यदि गेहूं की एक बोरी उधार देता तो बदले में उसे सोने के टुकड़ों से भरा हुआ बोरा मिला करता था ‘ यह कहते हुए किसान एक बोरे में आटा भरना शुरू कर दिया। इस बीच बौना नीचे बैठ गया रोते हुए बोला- ‘हमने रात में एक बड़ी पार्टी करनी है, समय पर सहायता करने के लिए आभार और आप सूरज के नीचे जिस चीज को चाहोगे वह आपका हो जाएगा।’

जब किसान ने यह सुना तो अपनी बुद्धिमत्ता पर बहुत प्रसन्न हुआ और कहा ‘धन्यवाद, प्रिय महोदय,’ उन्होंने कहा; ‘यह एक सौदा है और मैं इसके लिए सहमत हूं। मेरी पत्नी इस सौदे के लिए गवाह है। बौना ने कहा, ‘आपके पास इस पर सोचने के लिए एक सप्ताह होगा, मुझे अब चलना चाहिए, इसलिए मुझे आटा दें और सात दिन बाद आधी रात को आपने घर के पीछे पहाड़ी पर आ जाएं और आपके पास सौदेबाजी का आपका हिस्सा होगा।’ तो किसान ने आटा-बोरी बाँध ली, और बौने को उसकी पीठ पर रखने में मदद की।

माइकल- एक ड्राइवर

अगले सात दिनों को किसान ने सबसे अधिक प्राप्ति के बारे में सोचने विचारने में व्यतीत कर दिया। उसकी पत्नी ने कई सुझाव दिए, जिनसे वह सहमत नहीं था। एक हफ्ते के चिंतन के बाद आखरी रात को वे लोग ‘अपने पड़ोसी की संपत्ति मांगने का संकल्प’ के विकल्प पर सहमत हुए। वे लोग घर के पीछे वाले पहाड़ी पर गए। यह पूर्णिमा की रात थी, किसान चिंतित दिख रहा था। आधी रात में वह दिखाई दिया, जिसके हाथ में आटा-बोरी बड़े करीने से मुड़ा हुआ था। 

बौने ने कहा: ‘क्या आप समझौते से सहमत हैं?’ किसान ने हाँ में जवाब दिया साथ ही कहा कहा, ‘मेरी पत्नी इस सौदे की गवाह थी।

बौने ने कहा: ‘क्या आप समझौते से सहमत हैं?’ किसान ने हाँ में जवाब दिया साथ ही कहा कहा, ‘मेरी पत्नी इस सौदे की गवाह थी।

बौने ने कहा: ‘ आप क्या पाना चाहते हो? किसान ने कहा: ‘ मुझे पड़ोसी चार्ल्स की संपत्ति चाहिए।’

‘किसान चार्ल्स की खेत वर्तमान में चंद्रमा के नीचे हैं’, बौना ने शांत रूप से कहा,’ और इस तरह यह समझौते की शर्तों के भीतर नहीं है। आपको फिर से चुनना होगा।

इसके साथ ही किसान समझ गया कि वह कुछ भी नहीं चुन सकता है क्योंकि वह अब चंद्रमा के नीचे है। इसके साथ ही अपने किए पर उसे यह सोचकर पछतावा होने लगा कि: ‘निर्णय में देरी हुई या बौने ने उसे ठगा है। ‘